बुन्देलखण्ड के झांसी जिले की गरौठा विधान सभा के ब्लॉक बामौर मे पतित पावनी कलियुग की गंगा कहे जानी वाली मां बेत्रवती (वेतवा) के पवित्र दाहिने तट पर स्थित अति प्रचीन नगर एरच जहाँ भगवान श्री विष्णु जी ने तीन तीन बार पृथक पृथक रूपो मे अवतरित होकर दुष्टो का संहार करने हेतु श्री बाराह, श्री नृसिंह एवं श्री वामन रूप मे रोमांचकारी एवं प्रेम व भावनात्मक लीलाओं को चरितार्थ किया है
पौराणिक एवं एतिहासिक नगर एरच का इतिहास पूरे देश के लिए अत्यन्त महत्वपूर्ण है यहां प्राप्त पुरावशेषो के आधार पर यह निर्विवादित रूप से सिद्ध होता है कि नगर एरच ऐतिहासिक, पुरातात्विक व पौराणिक दृष्टि से एक महत्वपूर्ण पुरास्थल है।
श्री भक्त प्रहलाद जी की जन्म स्थली एरच जिसने समस्त देश व दुनिया को होली जैसे अनूठे पर्व की सौगात दी है एरच नगर के प्राचीन गौरव के प्रकटीकरण एवं एरच के सम्यक विकास हेतु पर्यटन के दृष्टिकोण से देश व दुनिया के मानचित्र पर स्थापित करने के लिए “श्री भक्त प्रहलाद जन कल्याण संस्थान” पूज्य श्री श्री 1008 संत श्री उमेश दत्त गिरि शाण्डिल्य जी महाराज महन्त नौ देवालय शक्ति पीठ एरच के सानिध्य में समस्त एरच नगरवासियों की उपस्थिति मे स्थापना की गई।
श्री भक्त प्रहलाद जन कल्याण संस्थान ने पत्राचार के माध्यम से प्रशासनिक विभागों एवं माननीय जन प्रतिनिधि जनों के अलावा सामाजिक संगठन राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ को नगर एरच के पुरातात्विक, पौराणिक महत्व से अवगत कराया।
क्षेत्रीय विधायक माननीय श्री जवाहर लाल राजपूत जी ने इस विषय को उत्तर प्रदेश विधान सभा मे रख कर एरच को प्रदेश मे पहचान दिलाने का कार्य किया एवं संस्थान द्वारा सार्वजनिक सहयोग से आयोजित “होली एरच महोत्सव” को उत्तर प्रदेश के पर्यटन विभाग से वित्तीय सहायता दिलाकर महोत्सव को भव्यता प्रदान कराई ।
उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग द्वारा वर्ष 2021-22 मे वित्तीय सहायता के रूप मे रूपये 5,00,000 (पांच लाख रूपये ) तथा वर्ष 2023 मे रूपये 10,00,000 (दस लाख रूप्ये) मिलने से न केवल कार्यक्रम का रूप भव्य हुआ है बल्कि होली एरच महोत्सव मे सहभागिता करने वाले विभिन्न कलाकार, साहित्यकार एवं बुन्देली संस्कृति के गायन, वादन एवं नृत्य कला से जुडे कलाकारों को भरपूर सम्मान के साथ एक भव्य मंच मिलने का कार्य निरंतर हो रहा है।
बुन्देली संस्कृति की परम्पराओं के आत्मीयता व समरसता का भाव जगाने वाले उत्सव जैसे झिझिया, टेसू, मामुलिया आदि को प्रतियोगिताओं का रूप देकर युवा पीढ़ी को जोड़ने के कार्य से बुन्देली संस्कृति के सम्बर्द्धन होने का मार्ग प्रशस्त हुआ है। शारीरिक पुष्टता एवं खेल जगत के प्रति आकर्षण पैदा करने हेतु प्रतियोगिताओं में दौड़, गोला फेक, भाला फेक, कबड्डी, अखिल भारतीय दंगल आदि कार्यक्रमों के साथ मानसिक विकास के लिए सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता व वाद विवाद प्रतियोगिताओ का आयोजन होली एरच महोत्सव की उपयोगिता को जन सामान्य के बीच बढ़ा रहा है।
बुन्देली संस्कृति व सभ्यता का साक्षात् स्वरूप होली एरच महोत्सव मे मातृ शक्ति द्वारा बुन्देली व्यंजन प्रतियोगिता के आयोजन मे सहभागिता से चार चाँद तो लगे ही है साथ ही मानव जीवन को स्वास्थ्य की दृष्टिकोण से बुन्देली व्यंजन कितने उपयोगी हैं, इस विषय पर भी प्रकाश पड़ा है। मोटे अनाज, दालें, मसाले, व देशी घी बुन्देली व्यंजन मे प्रमुख भूमिका निभाकर व्यंजनो को स्वादिष्ट व पाचक एवं बल वर्धक बनाते हैं। विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन प्राथमिक कक्षाओं के विद्यार्थियों से उच्च शिक्षा गृहण कर रहे उच्च शिक्षार्थियो को निबन्ध रचना, चित्रकला, मूर्तिकला, के माध्यम से समस्त प्रतिभाशाली छात्र छात्राओं को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर प्रदान कर रहे है। विभिन्न प्रतियोगिताओं में सहभागी जनों में प्रतिभा को श्रेणीवार पुरूस्कृत करने के निर्णय हेतु निर्णायक मण्डल की आवश्यकता संस्थान की विचारधारा से जुड़े सेवारत एवं सेवानिवृत्त शिक्षक एवं नगर के सभ्रांतजनों के सहयोग से पूरी होती है । होली एरच महोत्सव मंच के माध्यम से समय-समय पर जन-जागरूक स्लोगन जैसे- बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, जल ही जीवन है, रक्तदान महादान, स्वच्छता सम्बन्धी आदि प्रचार-प्रसार समाज को जागरूक बनाने में सहायक सिद्ध हो रहा है। महोत्सव में विभिन्न शिविरों के माध्यम से केन्द्र व राज्य सरकार की जन कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी सम्बन्धित विभागीय अधिकारियों द्वारा आम जनमानस को सीधे प्राप्त होती है। जिससे अधिक संख्या में पात्र व्यक्तियों को योजना का लाभ मिलने का मार्ग प्रशस्त हो रहा है। होली एरच महोत्सव की बढ़ती हुए भव्यता स्थानीय स्तर पर नए रोजगारों को भी जन्म दे रही है एवं नगर के बाजार में भी बिक्री की बढ़ोत्तरी हो रही है । यद्यपि पूर्व में महोत्सव नगर व क्षेत्र वासियों के आर्थिक सहयोग से होता रहा है और आज महोत्सव नगर व क्षेत्र के रोजगार को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा
है ।
मढ़िया घाट स्थित माँ वेत्रवती (वेतवा) जी की महाआरती होली एरच महोत्सव का अभिन्न कार्यक्रम है। अति प्राचीन महादेव मड़िया मंदिर पर प्रातः अभिषेक एवं संध्या बेला में वेतवा जी की महाआरती नगर व क्षेत्र वासियों के द्वारा पूरे श्रद्धा भाव से की जाती है । जहाँ सैकड़ों की संख्या में भक्तगण उपस्थित रहते हैं। सभी श्रद्धालुगण सुविधाजनक तरीके से स्नान, ध्यान, पूजा, पाठ, आरती व्यवस्थित रूप से कर सकें इस हेतु श्री भक्त प्रहलाद जन कल्याण संस्थान ने पक्के घाट निर्माण कराने की माँग की है जिसे उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग ने इस वर्ष कार्य योजना में स्वीकृत कर लिया है तथा रूपये 465.71 लाख से घाट निर्माण होना तय हो गया है।
महोत्सव में समाज में उत्कृष्ट कार्य करने वाले लोगों एवं कलाकार, चित्रकार, मूर्तिकार, गायक, वादक, कविगण आदि खिलाड़ी, पहलवान, मेधावी छात्रों के सम्मान तथा सेवा निवृत्त सैनिकों को सम्मानित करने हेतु विशेष कार्यक्रम किए जाते है ।
एरच के महत्व एवं महोत्सव की भव्यता को प्रिन्ट व इलेक्ट्रोनिक्स मीडिया के माध्यम से आप तक पहुचाने वाले पत्रकार बन्धुओं का पूरे सम्मान के साथ आभार प्रकट किया जाता है।
महोत्सव में शांति और सुरक्षा व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने में सक्रियता से अहर्निस सेवाएं देने वाले पुलिस प्रशासन का सहयोग सराहनीय रहा है।
वर्ष 2023 के होली एरच महोत्सव में पर्यटन विभाग ने दस लाख रूपये की वित्तीय सहायता मुहैया करायी एवं महोत्सव का शुभारम्भ जिलाधिकारी महोदय झाँसी श्रीमान रविन्द्र कुमार जी, मा० श्री जवाहर लाल राजपूत जी विधायक गरौठा, वरिष्ठ पुलिस अधिक्षक श्रीमान राजेश एस. जी, उपजिलाधिकारी गरौठा श्रीमान अतुल कुमार जी, क्षेत्राधिकारी पुलिस गरौठा श्रीमान विवेक सिंह जी, तहसीलदार गरौठा वन्दना कुशवाहा जी खण्ड विकास अधिकारी श्रीमान राहुल मिश्रा जी, अधिशाषी अधिकारी नगर पंचायत एरच श्रीमान कमाल अहमद एवं अन्य विभागीय अधिकारी गण, जनप्रतिनिधि गण, पत्रकार गण, एरच नगर व क्षेत्र के सम्मानीय नागरिक गणों की उपस्थिति में श्री भक्त प्रहलाद जन कल्याण संस्थान के संयोजन में भव्यता के साथ सम्पन्न हुआ। इस पंच दिवसीय महोत्सव के मध्य केन्द्रीय राज्य मंत्री मा. भानु प्रताप सिंह वर्मा जी, एम. एल. सी. मा. बाबूलाल तिवारी जी, एम. एल. सी. श्रीमती रमा निरंजन जी, मा. पवन गौतम जी, जिला पंचायत अध्यक्ष