आगामी कार्यक्रम

तीर्थ स्थली एरच यश प्रचार रथ यात्रा

श्री भक्त प्रहलाद जी की नगरी तीर्थ स्थली एरच ने आपको याद किया है, एरच के उत्थान में क्या आप सहभागी बनने को तैयार है ?

सादर आग्रह ,
                      बड़े गौरव एवं हर्ष का विषय है कि प्रागैतिहासिक नगर एरच, जो श्री भक्त प्रहलाद जी की नगरी है, यहाँ भगवान विष्णु के तीन-तीन अवतार श्री बाराह, श्री नरसिंह एवं श्री वामन भगवान के रूप में हुए है। होली जैसे रंगों के पावन पर्व की शुरुआत भी यहाँ से हुई है। ऐसी एरच नगरी जो समूचे बुन्देलखण्ड का गौरव है, हमारे झांसी जिले की पौराणिक /सांस्कृतिक धरोहर है। ऐसी परम पावन तीर्थ स्थली के विस्मृत वैभव को प्रकाशित करना हम सभी बुन्देलखण्ड वासियों का परम कर्तव्य है।

                     एरच नगर के विस्मृत वैभव की पुनर्स्थापना हेतु श्री भक्त प्रहलाद जन कल्याण संस्थान अहिर्निशि प्रयासरत है। संस्थान के प्रयास क्षेत्रीय विधायक मा. जवाहर लाल राजपूत जी के सहयोग एवं उत्तर-प्रदेश सरकार के माननीय मुख्यमंत्री पूज्य श्री योगी आदित्यनाथ जी के आशीर्वाद से आज एरच नगर में उत्तर-प्रदेश पर्यटन विभाग द्वारा प्रति वर्ष दस लाख रुपये की वित्तीय सहायता से होली एरच महोत्सव का भव्य आयोजन पूज्य संत महंतगण, मा. जनप्रतिनिधिगण, सम्मानीय कलाकारगण, आदरणीय प्रशासनिक अधिकारीगण , सम्माननीय पत्रकार बंधुओं ,सम्माननीय सम्भ्रांत जन आदि की उपस्थिति के साथ होली एरच महोत्सव मातृशक्ति , वरिष्ठजन , युवाओं के साथ हर वर्ग की सहभागिता एवं समरसता से परिपूर्ण, सर्वस्पर्शी भाव के साथ सम्पन्न होने लगा है। वेत्रवती (वेतवा) नदी के दाहिने तट मड़ियाघाट पर पक्के घाट का निर्माण कार्य चल रहा है। इसी क्रम में संस्कृति विभाग द्वारा श्री भक्त प्रहलाद जी सहित श्री नरसिंह भगवान जी 12.5 फीट ऊंची कांस्य प्रतिमा स्थापना, एरच किला गढ़ी हनुमान मन्दिर के प्रांगण में किये जाने के अवसर पर समस्त झांसी जिले के सम्मान्नीय श्रद्धालु / धार्मिक जनों, संस्कृति प्रेमी जनों के साथ जिले के आम जन मानष के हृदय में एरच नगर की धार्मिक मान्यता को स्थापित करने एवं पावन तीर्थ स्थली एरच के विस्मृत बैभव की पुनर्स्थापना में समस्त जिले वासियों को सहभागी बनाने पौराणिक धार्मिक तीर्थ स्थली एरच के यश को प्रकाशित करने हेतु आगामी समय में श्री भक्त प्रहलाद जन कल्यान संस्थान द्वारा तीर्थ स्थली “एरच यश प्रचार रथ यात्रा” का होना सुनिश्चित किया गया है। जिसमें आप सादर आमंत्रित है !

संक्षिप्त रोड मानचित्र
– तीर्थ स्थली एरच यश प्रचार रथ यात्रा नगर एरच से प्रारम्भ होकर गुरसराय, गरौठा, मऊरानीपुर से बरुआसागर से झांसी पहुंचेगी। झांसी से बड़ागांव, चिरगांव, मोंठ से समथर पूंछ होकर एरच में सम्पन्न होगी।

यात्रा का उद्देश्य
– पावन तीर्थ स्थली एरच के यश को प्रकाशित करने के साथ आम जन मानष के हृदय में एरच नगर की धार्मिक मान्यता को स्थापित करना ।
– पावन तीर्थ स्थली एरच के उत्थान में सभी को सहभागी बनाना
– संस्कृति विभाग द्वारा श्री नरसिंह भगवान व श्री भक्त प्रहलाद जी की कांस्य प्रतिमा स्थापित किये जाने में आंशिक आर्थिक सहयोग हेतु ।

उमेश शांडिल्य
प्रबंधक
श्री भक्त प्रहलाद जन कल्याण संस्थान

अमित चौरसिया
अध्यक्ष
श्री भक्त प्रहलाद जन कल्याण संस्थान

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श्री श्री 1008 संत श्री उमेश दत्त गिरि, शाण्डिल्य जी महाराज

महंत - नौ देवालय शक्ति पीठ एरच झांसी
प्रबन्धक - श्री भक्त प्रहलाद जन कल्याण संस्थान

सन् 2006 में संत श्री श्री 1008 श्री उमेश दत्त गिरि शाण्डिल्य जी महाराज का शुभागमन हमारे नगर एरच में हुआ। महाराज जी ने एरच नगर के लगभग सभी मन्दिरों के जीर्णोद्धार का कार्य प्रारम्भ करके एरच नगर के तीर्थ स्थलीय स्वरूप को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जो आज भी निरन्तरता की ओर अग्रसर है।

महाराज जी का जन्म जिला जालौन के कोटरा नगर में शाण्डिल्य (ब्राह्मण) परिवार में हुआ । संवत् 2010 माघ शुल्क पंचमी सोमवार के दिन श्री शम्भूदयाल एवं श्रीमती सुशीला देवी शाण्डिल्य जी के यहां जन्म हुआ । अपने बाबा गुरू श्री पन्नालाल शाण्डिल्य जी की प्रेरणा से बचपन में ही ईश्वर की भक्ति का अंकुर महाराज जी के ह्रदय में पनपने लगा और महज 12 वर्ष की आयु में घर-परिवार का त्याग करके लोक कल्याणार्थ संत रूप धारण कर लिया ।

नगर कोटरा के बाहर स्थित जंगल में माँ रक्त दंतिका मन्दिर, भीतर कोट माता मंदिर, श्री नक्की बाबा मन्दिर आदि स्थानों पर रहकर जप-तप करने लगे महाराज जी की शिक्षा गुरू शिष्य परम्परा के आधार पर है। वर्तमान में महाराज जी का भागवताचार्य एवं ज्योतिषाचार्य का भी एक रूप समाज के मध्य है।

अपने पैतृक नगर कोटरा के बाद देश के विभिन्न राज्यों में कई मठ-मंदिरों का जीर्णोद्धार एवं संचालन व्यवस्था सुचारू कराते हुए वर्ष 2004
में डीकांचल पर्वत पर विराजमान माँ छिन्नमस्ता देवी डिकौली माता मंदिर पर महाराज जी का आगमन हुआ ।

डिकौली ग्राम में ग्राम वासियों के सहयोग से मंदिर परिसर में एक यज्ञशाला का निर्माण कराकर एक विशाल महायज्ञ का आयोजन किया ।
डिकौली के बाद महाराज नगर एरच के पूर्व में स्थित बड़ी माता मंदिर वर्तमान नाम नौदेवालय शक्ति पीठ जो श्री भक्त प्रहलाद जी की माँ कयाधु की ईष्ट देवी के नाम से जानी जाती है, की गोद में अपना आसन माया और जप-तप हवन पूजन के आयोजन से नगर को भक्ति के विशेष काल का अनुभव करा दिया ।

नौदेवालय शक्ति पीठ पर आते ही एक पक्की यज्ञशाला का निर्माण कार्य प्रारम्भ कर दिया एवं एरच नगर में मंदिरों का जीर्णोद्धार एवं महायज्ञ आयोजन आरम्भ हुए क्रमशः श्री रूद्रचंडी महायज्ञ, शतचंडी महायज्ञ, श्री हरीहरात्मक महायज्ञ, श्री राम महायज्ञ आदि यज्ञ इस क्रम में सम्मिलित है। प्रत्येक यज्ञ में कन्या विवाहों का होना अनिवार्य एवं विशेष रहा। मंदिरों के जीर्णोद्धार में विशेष रूप से नौदेवालय शक्ति पीठ श्री बाराही माता मंदिर, श्री मंशादेवी मंदिर, श्री दुर्गाजी का मंदिर, श्री खैरापति हनुमान मंदिर, श्री मंशापूर्ण हनुमान मंदिर और इस प्राचीन मंदिर जीर्णोद्धार के क्रम में श्री संकटमोचन सरकार मंदिर के जीर्णोद्धार से सम्बन्धित एक कथा है जो इस प्रकार है :-

दिनांक 25 दिसम्बर 2010 को प्रातः 4.00 बजे महाराज जी के स्वप्न में किसी बुजुर्ग ने महाराज जी का हजारा ( जाप करने वाली माला) को उनके हाथ में रख दिया । एकाएक महाराज जी की आँख खुली तो हजारा उनके हाथ में था और किसी के जाने की आहट का अनुभव महाराज जी को हुआ, माला अपने हाथ में देखकर महाराज ने आवाज लगाई कौन है ? क्योंकि सोते वक्त हजारा उनके सिरहाने रखा होता था महाराज जी के आवाज लगाते ही वापसी में आवाज आई वही हैं पिछले कई दिनों से श्री संकटमोचन सरकार मंदिर के जीर्णोद्धार की योजना महाराज जी के मन-मस्तिष्क में चल रही थी तो इस घटनाक्रम को श्री संकटमोचन सरकार की प्रेरणा मानकर उसी दिन मंदिर में जीर्णोद्धार का कार्य प्रारम्भ हो गया और वर्ष 2012 में श्री संकटमोचन सरकार पर भव्य मंदिर निर्माण कार्य सम्पन्न होने के साथ श्रीराम महायज्ञ का सफल आयोजन हुआ। महाराज जी द्वारा संकल्पित हमारे नगर एरच में निर्माण कार्य एवं सांस्कृतिक / धार्मिक कार्यक्रमों में नगर वासियों का भी तन-मन-धन से पूर्ण सहयोग रहता है।

उमेशदत्त गिरि महाराज जी “परमारथ के कारणे साधुन धरा शरीर ” पंक्ति को चरितार्थ कर रहें हैं।

जीर्णोद्धार निर्माण कार्य के दौरान सेवा दे रहे कारीगर एवं श्रमिक बन्धुओं के साथ महाराज जी श्रम भी करते है एवं भवन / मठ सरचना में कारीगरों का मार्गदर्शन करते देखे गए है। सभी को भोजन स्वयं बनाकर कराने में उनकी बड़ी रूचि है और वास्तविकता में महाराज जी के द्वारा तैयार किए गए भोजन का स्वाद विशेष होता है। महाराज जी निरन्तर परिश्रम करते है आपकी जानकारी के लिए बता दूँ कि वह एक पैर से दिव्यांग है लेकिन उन्होंने अपनी इस दिव्यांगता को अपने परिश्रम और दृढ़ इच्छा शक्ति से हरदम दबाकर रखा है। वर्ष 2019 में श्री भक्त प्रहलाद जन कल्याण संस्थान की स्थापना कराकर संस्थापक प्रबन्धक के रूप में हम सभी को मार्गदर्शन महाराज जी द्वारा मिल रहा है । संस्थान द्वारा आयोजित होली एरच महोत्सव आज प्रान्त स्तरीय दर्जा प्राप्ति की ओर अग्रसर है ।

सन् 2013 में एरच नगर के उत्साही युवाओं ने राम नवमी के दिन शोभा यात्रा निकालने का कार्यक्रम सुनिश्चित किया और शोभायात्रा प्रभु श्री रामजी का चित्र रथ पर रखकर छोटे बच्चों का श्रंगार कर उन्हें राम दरवार की झांकी के रूप में सजाकर रथ पर विराजमान कराकर गाजे-बाजे के साथ शोभायात्रा नगर भ्रमण के लिए निकलने ही वाली थी तभी किसी अराजक तत्व ने शोभा यात्रा में विघ्न डालने का प्रयास किया और यात्रा स्थिगत होने की स्थिति बन गई लेकिन पूज्य महाराज जी ने रथ पर चढ़कर जय श्री राम के नारे लगाते हुए यात्रा का शुभारम्भ कराया तो नगर के सभी उत्साही कार्यकर्ताओं के अन्दर एक ऊर्जा दौड़ी और बड़ी संख्या में जन समूह यात्रा में सम्मिलित हो गया अब प्रत्येक वर्ष रामनवमी के दिन भव्य शोभा यात्रा का भ्रमण पूरे नगर में होता है।

श्री श्री 1008 संत श्री उमेशदत्त गिरि शाण्डिल्य जी महाराज महन्त नौ देवालय शक्तिपीठ एरच (झाँसी) प्रबन्धक – श्री भक्त प्रहलाद जन कल्याण संस्थान

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