एरच नगर प्रागेतिहासिक काल में वैभवशाली नगर के रूप में स्थापित रहा है यहां प्राप्त सिक्के, नगर मुद्राएं एवं ईटों पर अंकित अभिलेखो के आधार पर यह निर्विवादित रूप से सिद्ध होता है कि एरच नगर एक अति प्राचीन सम्पन्न तथा वैभवशाली नगर रहा है एरच नगर की प्राचीनतम ऐतिहासिक, पौराणिक, पुरातात्विक, व्यापारिक एवं सांस्कृतिक आदि महत्व विशेष उल्लेखनीय है ।
एरच ईसा पूर्व छठवीं शताब्दी में सोलह महाजनपदों में चेदि महाजनपद की राजधानी था । पुनः ईसा पूर्व द्वितीय शताब्दी में दूसरी शताब्दी ई0 तक दशार्ण की राजधानी थी । एरच से ईशापूर्व तीसरी दूसरी शताब्दी के नगर सिक्के एवं नगर मुद्राएं मिली हैं जिन पर वृह्मी लिपि में एरकच्छ लिखा है इससे एरच के व्यापारिक एवं नगर प्रशासन का पता चलता है एवं यह उल्लेख खुदाई में मिली ईटों पर अंकित वृह्मी लिपि से यहां के अज्ञात शासकों की जानकारी मिलती है। इन अभिलेखों एवं सिक्कों से 12 शासकों, महासेनापति एवं आमल्य (मंत्री) का पता चलता है। चन्देल शासकों के समय में एरच पत्तला एवं विषय नामक प्रसाशनिक केन्द्र था । एरच में आपदा प्रबन्धन का भी विभाग था जिसके आमल्य का मुद्रांक मिला है।
एरच में पहली शताब्दी ई० जल संरक्षण का प्रमाण प्राप्त होता है एरच में अश्वमेध, सर्वमेध और पुण्डरीक यज्ञों का प्रमाण प्राप्त हुआ है। एरच के अभिलेखों से संस्कृत के महाकवि कालीदास का समय ईसापूर्व द्वितीय शताब्दी निर्धारित होता है । एरच के अभिलेखों से सेनापति पुष्यमित्र का वंश, शुंग के स्थान पर बैम्बिक प्रमाणित होता है जो भारतीय इतिहास का महत्वपूर्ण शोध है।
एरच का ईसापूर्व की शताब्दियों में विदेशों के साथ व्यापारिक सम्बन्ध था । एरच से एरच के नगर सिक्के, यहां के शासकों के सिक्के, अधिकारियों के सिक्कों के अतिरिक्त प्राचीन भारत के अन्य नगरों जैसे कौशाम्बी, पदमावती एवं उज्जैन आदि के शासकों के सिक्के भी प्राप्त हुए है। एरच में विधानगिरि की हस्त लिखित पुस्तक भक्ति मनोहर है जो संवत् 1912 में लिखी गई है। यह रामचरित का महत्वपूर्ण काव्य है जिसमें साहित्यिक, सांस्कृतिक, भौगोलिक एवं ऐतिहासिक विवरण प्राप्त होते हैं। इस पुस्तक के आधार पर एरच को तीर्थ स्थल के रूप में वर्णित किया गया है। अतिप्राचीन काल के इस वैभवशाली नगर एरच में आज भारत सरकार द्वारा डिफेन्स कोरिडोर की स्थापना की जा रही है एवं श्री भक्त प्रहलाद जन कल्याण संस्थान द्वारा यहां के ऐतिहासिक एवं पौराणिक महत्व को देश व दुनिया के मानचित्र पर स्थापित करने की मुहिम से ऐसा प्रतीत हो रहा है जैसे एक स्थान से घूम कर समय का पहिया फिर उसी जगह आ रहा हो अर्थात एरच फिर से अपने उसी वैभव की ओर बढ़ रहा है। तीर्थ स्थल के रूप में विकसित हो रहा है, अपने प्राचीनतम सम्मान को प्राप्त करने जा रहा है ।